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 14:59 | 24/Jul/2008 | 2 Comment(s)
My Favourite

चलते-चलते

"तन्हा है मन इस ख्याल से
नही मिलोगे अब तुम मुझे
गुज़र जाएगी ये ज़िंदगी यूँ ही
तन्हाइयों में चलते-चलते...

आज रोशनी कितनी अँधेरी है,
ये सवेरा कितना काला है,
सूरज भी छिप गया है कहीं
मेरे साथ जलते-जलते...

एक उम्मीद फिर भी जिंदा है
मेरे दिल में आज भी,
इस छोटी सी दुनिया में तुम,
मिलोगे कहीं फिर चलते-चलते

 

Hey guys I m here again with my favourite one...jst take a glance

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 17:17 | 10/Jul/2008 | 6 Comment(s)

"वक़्त"

किस्से कई हैं...
यादें कई हैं...
किस-किस को बयां करूँ,
किस लावे को पिघला कर ओस बनाऊँ,
किस शबनम पे आग का कतरा रखूँ...
... जो एहसास कल साथ चल रहे थे,
वे आज ज़हन में घर बना चुके हैं,
कैसे भूल जाऊँ उस वक़्त को......
जो कल मेरा हमसफ़र था
और.......
आज मेरा गवाह......

 

 

...this is my favourite one, hope u guys also like it

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 15:34 | 9/Jul/2008 | 7 Comment(s)
my poetry

      "आवाज़"

 

ढलते सूरज की रोशनी के पार
जैसे कोई बुला रहा है मुझे
पर कहीं कोई निशां नहीं
कहीं कोई आहट नहीं
जाने क्यूँ खिच जाती हूँ मैं,
कदम... क्यूँ बढ़ते हैं उस आवाज़ की ओर
पर चलते-चलते ठिठक जाते हैं पाँव
ना आगे का रास्ता मिलता है
ना उस आवाज़ का कोई सुराग...
उस आवाज़ का दर्द झकझोर देता है मुझे,
ऐसा लगता है कोई छूट रहा हो मुझसे
कोई दूर हो रहा हो मुझसे
और... डूबते सूरज के साथ
वह आवाज़ भी क्षितिज में डूब जाती है
और मैं.........
खड़ी रह जाती हूँ अंधेरे में
निस्तब्ध................ और अकेली
सुकून और व्याकुलता के द्वंद के साथ
लौट पड़ती हूँ अपने बसेरे की ओर
मन में हलचल लिए..........
कौन है ?
क्या कहना चाहता है ?
क्यूँ उसका दर्द मुझे सालता है ?
मुझे इंतज़ार है अगले दिन सूरज डूबने का,
क्यूँकि... मैं पहचानना चाहती हूँ उस आवाज़ को,
समझना चाहती हूँ उसकी अनकही बातों को,
बाँटना चाहती हूँ उसके दर्द को,
मिटाना चाहती हूँ अपने अंतर्द्वंद को,
इसलिए, इंतज़ार है मुझे........
ढलते सूरज का.....
उस आवाज़ का.......

                       -shweta

Permalink 
 12:35 | 27/May/2008 | 22 Comment(s)
MY FAVOURITE

         "माँ"

"गर खुदा कहे कि
ज़न्नत का जलवा है मेरी पनाहों में...
तो मैं कहूँ ,
वहाँ भी किसी 'माँ' की हस्ती होगी,
नज़ारे कितने भी हो
मौसम-ए-दुनिया के रहबर,
हर पहलू मे 'माँ' की कायनात होगी"

 

 

 

 

I dnt know the compooser of these wonderful lines...but this is very close to my heart, So I m sharing this with you all & hoping that you guys also like the Purity & Dignity of this poem....

Permalink 
 13:37 | 28/Apr/2008 | 33 Comment(s)
MY POETRY

         "IKRAAR"


ये रात की तन्हाई का आलम


और ज़हन मे तुम्हारे ख्यालों का मौसम



दिल मे तुम्हारी यादें
और आँखों मे तुम्हारे ख्वाब
ना नींद आती है ,
ना आँख खोलने को जी चाहता है,
डर लगता है
कहीं टूट ना जाए
वो ख्वाब, जो अरसे से संजोया है...
बिखर ना जाए वो यादों के मोती ,
जिन्हे दिल की गहराइयों मे पिरोया है...
टूट ना जाए ख्यालों का सिलसिला
जिसे पल-पल जोड़कर
दिल मे सजोया है...
बीत ना जाए ये तन्हाई का मौसम
जिसने तुम्हारे प्यार की
रिमझिम बरसात मे भिगोया है...
कि आ जाओ
हम इकरार करते हैं..........
आज कहते हैं कि हम
तुमसे प्यार करते हैं.....
तुमसे प्यार करते है........


                       -SHWETA

Permalink 
 16:25 | 5/Apr/2008 | 23 Comment(s)
MY POETRY

           SAWAAL

" मन्ज़िल है दूर किनारा भी नही है,
लेकिन किनारे का न होना ही
शायद सही है...
थक के ग़र बैठे तो
सदियाँ गुज़र जाएंगी
मन्ज़िल हमारी राहों से
और दूर निकल जाएगी,
राहें आसान होंगी
जो तुम साथ दोगे...
हाथों मे मेरे तुम
जो अपना हाथ दोगे,
मेरी मन्ज़िल भी तुमसे है
और सफ़र भी,
क्या संभलने के लिए
तुम अपना हाथ दोगे ?
मेरे हमसफ़र बनकर
क्या मेरा साथ दोगे ?"

                         -SHWETA

Permalink 
 11:17 | 5/Apr/2008 | 28 Comment(s)
MY POETRY

"RAAT"

Ye Raat,

Kitna sukun deti hai hamen

Or khud,

Kitni Akeli.....Kitni Tanha hai ye Raat

Iski Shoonya si Khamoshi

Chain deti hai hamen

Lekin tanhai mein ............

Kitni Bechain rehti hogi

Jaise Akelapan hi iski Taqdeer ho

Na koi Saathi....Na koi Humsafar,

Kabhi-kabhi char din chandani ke hote hai iske bhi

Lekin Andhera hi iski Pehchaan hai:

Kabhi Dost....kabhi Dushman

Kitne hi naam milte hai,

Par sabhi ka saath nibhate hue

Chalti rehti hai apni hi raah par

Kabhi Chand-Taaron ke saath....

To kabhi Akele hi,

Koi Shikva Nahi.....Koi Shikayat nahi

Bas chalti rehti hai............................

Apni kabhi na khatm hone wali raah par...

Khamosh...............................aur

Akeli.......................................

                                -Shweta

 

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 11:15 | 12/Mar/2008 | 147 Comment(s)
MY POETRY

                   "यादें"   

गुजरा है बचपन जहाँ की गली मे,
छूट रही हैं वो गाँव की गलियाँ...
बिताए हैं साथ जिनके प्यारे वो दिन,
छूट रही हैं वो सखियाँ-सहेलियाँ...

सोचा था दिल को मना लेंगे हम,
ना याद करेंगे ये गाँव, ये गलियाँ.......
वो सखियाँ-सहेलियाँ.......
वो बातें......वो अठखेलियाँ........

मगर भूले थे हम कि
यादें..... जो सिर्फ याद आती हैं........
महफिल में, तन्हाई में,
आईने में, परछाईं में,
गमों में, शहनाई में.....

वो गाँव की गलियों की यादें..
वो सखियों-सहेलियों की यादें...
वो प्यार की बातें...
वो सपनो की रातें...
वो दीवाली की मस्ती...
वो होली के रंग...
बिताए दिन जो सखियों के संग...

वो मिट्टी की खुश्बू...
वो खेलों का जादू...
वो किस्से- कहानियाँ...
वो रूठना- मनाना...
वो रेत के घर, वो खुशियों का तराना...

बहुत याद आते हैं हमें
बहुत सताते हैं हमें...
अब हमने जाना
कि इन्हे भूल जाना
मुश्किल नही.... नामुमकिन है

क्यूँ कि..................................
यादें...........याद आती हैं
बातें.......... भूल जाती हैं
यादें............................
यादें............................

                       -shweta

I composed this poem wen I was leaving my home for shifting to new home. this is very close to my heart...even today I miss all those things..........

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 12:59 | 7/Mar/2008 | 14 Comment(s)
MY POETRY

"हम तमाम उम्र उन्हे भुलाते रहे
मग़र मह्सूस हुआ
कि भुलाने की कोशिश में
वो और भी याद आते रहे...
सुनते थे वक़्त के साथ
हर ज़ख्म भर जाता है
हर याद खो जाती है
मग़र यादों के बिना,
ज़िंदगी और भी मुश्किल हो जाती है
वक़्त भी तो वफ़ा कर ना सका,
मेरे गहरे ज़ख्म भर ना सका,
अब तो तन्हाई मेरी साथी है,
ज़िंदगी तेरे बिना रुलाती है,
शायद........नसीब को मेरे
अब यही मंज़ूर है...................
इसीलिए, तू मुझसे
दूर...............बहुत दूर है........."

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 11:46 | 5/Mar/2008 | 9 Comment(s)
REGARDS

Thank You All..............Thanx a lot for your such a warm response..........

But honestly............I want to clear one thing that the poem "Mohabbat" is not my own composing. I have presented this poem with the title "My Favourites". This is my favourite one. I post my own composing with the title "My Poetry".

I am very greatful to "Mr. Kumar Vishwas", who composed this nice poem. Actually I like it very much, so I just wanted to share it with u friends.........

I am also very greatful to those persons, who found some time for me from their busy schedule. I got more than 1500 mails within two days in the response of my post. I felt myself on the seventh heaven.Sorry But I am not the real one to get these appriciations. I respect your suggetions & like your attitude to praise someone. You never know, how much energy & confidence I got bcoz of you all.

To make comments on my own talent please read my post with the title "My Poetry". Please keep giving your Suggetions & Love to me always. Once again I want to pay my regards to all of you from the bottom of my Heart.

Thank you all & Love you all & God bless you all...........(Direct Dil Se)

                                                                                   Your's Shweta

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