|
MY POETRY
"हम तमाम उम्र उन्हे भुलाते रहे मग़र मह्सूस हुआ कि भुलाने की कोशिश में वो और भी याद आते रहे... सुनते थे वक़्त के साथ हर ज़ख्म भर जाता है हर याद खो जाती है मग़र यादों के बिना, ज़िंदगी और भी मुश्किल हो जाती है वक़्त भी तो वफ़ा कर ना सका, मेरे गहरे ज़ख्म भर ना सका, अब तो तन्हाई मेरी साथी है, ज़िंदगी तेरे बिना रुलाती है, शायद........नसीब को मेरे अब यही मंज़ूर है................... इसीलिए, तू मुझसे दूर...............बहुत दूर है........."
|
|