चलते-चलते
"तन्हा है मन इस ख्याल से
नही मिलोगे अब तुम मुझे
गुज़र जाएगी ये ज़िंदगी यूँ ही
तन्हाइयों में चलते-चलते...
आज रोशनी कितनी अँधेरी है,
ये सवेरा कितना काला है,
सूरज भी छिप गया है कहीं
मेरे साथ जलते-जलते...
एक उम्मीद फिर भी जिंदा है
मेरे दिल में आज भी,
इस छोटी सी दुनिया में तुम,
मिलोगे कहीं फिर चलते-चलते
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